आपका हार्दिक स्वागत है

आपस में चुप

कमरे में

हम चार हैं

हम चारों यार हैं

हम बहुत दिनों बाद मिले हैं

हम बहुत-सी बातें करना चाहते हैं

हमारे पास बहुत-से कार्यक्रमों के सिलसिले हैं

हम इसीलिए इकट्ठा हुए हैं

लेकिन हम इस पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं

हम उपग्रहों से अपना सम्पर्क

थोड़ी देर के लिए भी स्थगित नहीं कर रहे हैं

अजीब है कि

हम बाहर के लोगों से बतिया रहे हैं

और आपस में चुप हैं!

2. न कोई रात

चांद को देख लूं

पूरा,

पूरी चांदनी के साथ

अगर किसी रात अंधेरी

ख़्वाब में ही

जो संभव ख़्वाब में ही है

तो चाह पूरी हो जाये मेरी

जो ख़याल-ख़याल घूम-घूमकर

ख़ुद एक ख़याल बन गयी है

राह के बिना,

न कोई रात

स्याह आह के बिना

3. जगह-जगह मौसम

बालासोर में फैनी

तूफ़ान का ज़ोर है

बनारस में मौसम

मस्त झकाझोर है

पता नहीं

बालासोर में वोट पड़ गया है

या पड़ेगा,

बनारस में

पड़ा नहीं है

पड़ेगा

तूफ़ान आते-आते रहते हैं

एक मौसम जो चलता रहता है

उसी में कुछ थोड़ा बहुत बदलता रहता है

मगर देश बदलेगा

सत्याग्रह के वोट से ही

सशस्त्र संघर्ष एक वामपंथी ख़याल है

पता नहीं

गढ़चिरौली का क्या हाल है!

वोट पड़ा कि नहीं?

वोट पड़ेगा कि नहीं?

मौसम कैसा है?

4. मैं केवल इतना चाहता हूं

मैं भारतीय हूं

मैं बंधा हूं लोकतंत्र से

मगर मैं स्वतंत्र हूं

वोट देने के लिए

किसी भी दल को

चाहे उसकी लहर हो

या न हो

मैं प्रत्याशियों को पहचान लूं

चिन्ह से

अपनी तरफ़ से

मुझसे कोई ग़फ़लत नहीं होनी चाहिए

ईवीएम के सामने

मैं निर्दल को भी पसंद कर सकता हूं

और नोटा को भी

मेरे वोट से

लोकतंत्र मज़बूत होगा

मैं और स्वतंत्र

मैं केवल इतना चाहता हूं

वरना, घोषणापत्रों में क्या नहीं है!

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