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डॉ. अनुराधा गुप्‍ता

एक दृष्टि : कृष्णा सोबती : ‘बादलों के घेरे’ से

“औक़त न  क़लम की /न लेखक की/न लेखन की/ज़िन्दगी फैलती चली गई/कागज़ के पन्नों पर/कुछ इस तरह ज्यों धरती में…

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