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संतोष त्रिवेदी

लात का साहित्यिक महत्व!

आलोचक-प्रभु प्रस्तर-पीठिका पर विराजमान थे। हमें देखते ही उन्होंने अपना दाहिना हाथ शून्य की ओर उठाया। मानो वे हमारी जड़ता…

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संतोष त्रिवेदी

टिकट-कटे की पीर!

उनका टिकट फिर कट गया। इस बार पूरी उम्मीद थी कि जनता की सेवा करने का टिकट उन्हें ही मिलेगा।…

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