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ग़ज़लें

1)

बेसहारे से सहारे की तरह मिलता हूँ

बदगुमानों से आईने की तरह मिलता हूँ

मौसम के मिज़ाज कितने भी बिगड़े हों

सैलाब में किनारे की तरह मिलता हूँ

आग की दरिया में बहने का शग़ल है

शमां से परवाने की तरह मिलता हूँ

डरकर शब, चांदनी, नज़ारे, चले गये

उजाले में अंधेरे की तरह मिलता हूँ

मोहब्बत में आँसुओं के मरासिम पुराने हैं

हमनवां से फ़साने की तरह मिलता हूं

भले ही रेत की तरह फिसलते रहे सपने

बेकलों से टूटे सितारे की तरह मिलता हूँ

2)

वे आँखों में किताब रखते हैं

हर बात का हिसाब रखते हैं

भले ही एक उम्र बीत गई

चेहरे पर आफताब रखते हैं

मन में उमंग हिलोरें लेती हैं

जुल्फों में खिजाब रखते हैं

उन्हें यूँ ही नकारा मत समझो

अनुभवों का सैलाब रखते हैं

प्यार के भूखे हैं प्यार से मिलो

हर वक्त दिलों में गुलाब रखते हैं

हिक़ारत की नजरों से मत देखो

आँखों में बहती चेनाब रखते हैं

रोक लो नश्तर जैसी बोल को

वे भी जबाव लाजवाब रखते हैं

3)

जब जीवन की राहों में चलना आ जायेगा

मुश्किलों में सुकून से जीना आ जायेगा

बारिश में बहने दो कागज़ की कश्तियाँ

इनके बिना भी हमें रहना आ जायेगा

पंखों से कोई परिंदा आसमान नहीं छूता

गर हो हौसला तो बुलंदी छूना आ जायेगा

दूसरों को देख मत बर्बाद कर खुद को

तकदीर में है तो जीतना आ जायेगा

आँखों में अश्कों के साथ सोना आ गया

देखना, खुशियों में जागना आ जायेगा

उदास दिल के साथ मुस्कराता रहा

एक दिन मौत पर हँसना आ जायेगा

माली है अपने फूलों की फितरत से अंजान

खुशबू को भी सरहद पार करना आजायेगा

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