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संजीव सिन्‍हा

देश भर के 400 से अधिक साहित्‍यकारों ने दिया नरेन्‍द्र मोदी को अपना समर्थन

भारतीय साहित्‍यकार संगठन की पहल पर भारतीय भाषाओं के 400 से अधिक साहित्‍यकारों ने लोकसभा चुनाव को लेकर देश के…

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डॉ. आलोक कुमार सिंह

विराट अनुभवों की महागाथा : पारिजात

नासिरा शर्मा साहित्य जगत का ऐसा नाम है जो साहित्य जगत में अपने बेबाक लेखन के लिए जानी जाती हैं।…

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दीप्ति अंगरीश

…बस अंतिम बार

मानो कल की बात होटेबल पर नया कैलेंडर सज गयादिन बीतते गएपर यादों का काफिला सदाबहारजानते हुई भी बेसुध रहीपीर…

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सुभाष चन्‍द्र

मेरी तो सौतन रही धर्मयुग : पुष्पा भारती

धर्मयुग यानी हिंदी पत्रकारीय जगत का एक मानक। जिसमें छपना और उसे पढना दोनों ही उस कालखण्ड के लिए खास…

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पंखुरी सिन्‍हा

डेटिंग ऑनलाइन

कागज़ होता तो वो चूमती उसे लेकर शायद उसका नाम भी लेकिन सबकुछ मायावी था तारों में, जालों में मशीन…

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कीर्ति दीक्षित

जनक की पाती उर्मिला के नाम

मेरी प्राणजा, मैथिली, जनकदुलारी, वैदेही, जानकी प्रिय उर्मिले, ये पत्र तो सीता जीजी के लिए है! मेरे इन संबोधनों को…

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डॉ. यशस्‍विनी पांडेय

दुनिया जैसी है उससे बेहतर चाहिए

हर व्यक्ति अपने जीवन में कई किरदारों को जीता हैं उसके व्यक्तित्व की पहचान इस बात से होती है कि…

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शिवांगी पुरोहित

गिरकर उठना सीख गई

हंसती खेलती मेरी दुनिया, एक दिन बेरंग हो गई।कुछ समझ ही न पाई मैं , उसके चले जाने के बाद।पहले…

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डॉ. वेद मित्र शुक्ल

हिंदी लोकतांत्रिक एवं समन्वयकारी भाषा: रामदरश मिश्र

पुस्तक ‘जारी अपना सफ़र रहा’ का लोकार्पण हुआ अप्रैल 7, 2019. वरिष्ठ साहित्यकार रामदरश मिश्र के आवास पर हिंदी अकादमी…

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रवि शर्मा

साहित्य में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और हिमांशु जोशी

भारत में सभ्यता और संस्कृति शब्द जनसामान्य में प्रायः एक ही उद्देश्य से प्रयुक्त किए जाते हैं परन्तु इन दोनों…

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डॉ. अर्चना सिंह

धारणा और गुलाम

[1]         ‘धारणा’          काले, बड़ी-बड़ी जालियों वाले मोज़े           पहनने वाले को           भ्रम है …..           पैर नंगे नहीं…

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अंशु प्रियदर्शिनी

उस रात…

आंखों में खामोशी थी, सांसों में मदहोशी थी घुंघरुओं की खनखनाहट थी, दिल में अजीब सरसराहट थी, ख्‍वाबों में बेचैनी…

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बीरज पाण्‍डेय

ज्यों मेंहदी को रंग : निशक्तता की पीड़ा का जीवन्त दस्तावेज

संवेदनशीलता किसी भी समाज की पूँजी होती है, जिसके नींव पर सभ्यता खड़ी होती है। अपने आसपास के जरूरतमंद व…

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डॉ.संदीप कुमार सिंह

शोषण तंत्र को बेनकाब करती मदन कश्यप की कविताएं

समकालीन हिंदी कविताओं में मदन कश्यप काफी चर्चित और पठित कवि हैं ।आम आदमी के हक-हकूक के लिए वे पूर्ण…

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पंकज कुमार

तुम ऐसी कैसे हो सकती हो?

तुम कल भी माँ थी किसी की, किसी की थी बहन, बेटी और पत्नी और आज भी हो पूजता आ…

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संजीव सिन्‍हा

साहित्‍यिकी डॉट कॉम का लोकार्पण संपन्‍न

‘मंगल भवन अमंगल हारी’ है साहित्‍य का ध्‍येय : डॉ. कमल किशोर गोयनका सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार एवं केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल…

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गिरीश पंकज

टिकट पक्का हो गया

चुनाव का समय था। प्रत्याशियों  के चयन की प्रक्रिया चल रही थी। कुछ ‘करछुल’ हाईकमान के पास पहुंचे और तर्क…

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डॉ. अल्पना सिंह

पराजित नायकत्व के दौर का साहित्य

हम सभी के बचपन में हर कहानी की शुरुआत हमेशा ‘एक था राजा’ से होती थी। वह राजा भी सर्वगुण…

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संतोष त्रिवेदी

टिकट-कटे की पीर!

उनका टिकट फिर कट गया। इस बार पूरी उम्मीद थी कि जनता की सेवा करने का टिकट उन्हें ही मिलेगा।…

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डॉ. अनुराधा गुप्‍ता

एक दृष्टि : कृष्णा सोबती : ‘बादलों के घेरे’ से

“औक़त न  क़लम की /न लेखक की/न लेखन की/ज़िन्दगी फैलती चली गई/कागज़ के पन्नों पर/कुछ इस तरह ज्यों धरती में…

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