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बीरज पाण्‍डेय

ज्यों मेंहदी को रंग : निशक्तता की पीड़ा का जीवन्त दस्तावेज

संवेदनशीलता किसी भी समाज की पूँजी होती है, जिसके नींव पर सभ्यता खड़ी होती है। अपने आसपास के जरूरतमंद व…

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डॉ.संदीप कुमार सिंह

शोषण तंत्र को बेनकाब करती मदन कश्यप की कविताएं

समकालीन हिंदी कविताओं में मदन कश्यप काफी चर्चित और पठित कवि हैं ।आम आदमी के हक-हकूक के लिए वे पूर्ण…

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पंकज कुमार

तुम ऐसी कैसे हो सकती हो?

तुम कल भी माँ थी किसी की, किसी की थी बहन, बेटी और पत्नी और आज भी हो पूजता आ…

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संजीव सिन्‍हा

साहित्‍यिकी डॉट कॉम का लोकार्पण संपन्‍न

‘मंगल भवन अमंगल हारी’ है साहित्‍य का ध्‍येय : डॉ. कमल किशोर गोयनका सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार एवं केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल…

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गिरीश पंकज

टिकट पक्का हो गया

चुनाव का समय था। प्रत्याशियों  के चयन की प्रक्रिया चल रही थी। कुछ ‘करछुल’ हाईकमान के पास पहुंचे और तर्क…

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डॉ. अल्पना सिंह

पराजित नायकत्व के दौर का साहित्य

हम सभी के बचपन में हर कहानी की शुरुआत हमेशा ‘एक था राजा’ से होती थी। वह राजा भी सर्वगुण…

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संतोष त्रिवेदी

टिकट-कटे की पीर!

उनका टिकट फिर कट गया। इस बार पूरी उम्मीद थी कि जनता की सेवा करने का टिकट उन्हें ही मिलेगा।…

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डॉ. अनुराधा गुप्‍ता

एक दृष्टि : कृष्णा सोबती : ‘बादलों के घेरे’ से

“औक़त न  क़लम की /न लेखक की/न लेखन की/ज़िन्दगी फैलती चली गई/कागज़ के पन्नों पर/कुछ इस तरह ज्यों धरती में…

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अज्ञेय

भारतीयता

भारत की आत्‍मा सनातन है, भारतीयता केवल एक भौगोलिक परिवृत्ति की छाप नहीं, एक विशिष्‍ट आध्‍यात्मिक गुण है, जो भारतीय…

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डॉ. सर्वेश सिंह

साहित्य की आत्म-सत्ता

साहित्य को लेकर चिंताएं फिर बढ़ने लगीं हैं। भूमंडलीकरण और इलेक्ट्रानिक माध्यमों के कुहरीले घटाटोप में उसके स्वरूप के दबने,…

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