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डॉ. वेद मित्र शुक्ल

दो ग़ज़लें

1. दामन नहीं भिगोया होगा, पर, अन्दर से रोया होगा। पहुँचे आज बुलंदी पर जो, सोचो क्या-क्या खोया होगा। आज…

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दीपाली अग्रवाल

वो शायर जो शराब की बोतल में डूबकर दुनिया को नशा देता था

शिव कुमार बटालवी के गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर कीप्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने…

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डॉ. विवेकानन्‍द उपाध्‍याय

भारतीय राष्ट्र के बोध का स्वरूप

राष्ट्र – राज्य की अवधारणा में मुख्य बात है भूमि की पवित्रता का भाव और वहां पर रहने वाली जनता…

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प्रो. संजय द्विवेदी

प्रौद्योगिकी ने दी है हिंदी लेखन को शक्ति

साहित्य और मीडिया की दुनिया में जिस तरह की बेचैनी इन दिनों देखी जा रही है। वैसी पहले कभी नहीं…

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स्‍मिता

डॉ. कमल किशोर गोयनका से बातचीत

प्रेमचंद के जीवन, साहित्य, विचार के अध्ययन और दुर्लभ अनुसंधान के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुके हैं कमलकिशोर गोयनका।…

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पीयूष द्विवेदी

हिंदी कविता की दुर्दशा के दोषी हैं वामपंथी साहित्यकार

आदिकाल से लेकर आधुनिक काल तक अपनी विकास-यात्रा की सहस्त्राब्दी पूरी कर चुकी हिंदी कविता के भाव, भाषा और शिल्प…

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जयंती

समर्पण

एक सीप, पा समंदर को मचल उठी; इतरा उठी पा गई वह शांति सागर की उत्तुंग लहरों में खुद को…

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डॉ. अखिलेश कुमार शर्मा

अलग-अलग वैतरणी

एक तरफ है उपन्यास सम्राट और कथा सम्राट प्रेमचंद की कालजयी कृति ‘गोदान‘ उपन्यास की कथा। तो दूसरी तरफ है…

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