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बिखरने लगे हैं लोग


अपनी ज़मी से ख़ुद ही उजड़ने लगे हैं लोग,

पत्तों की तरह आज बिखरने लगे हैं लोग।

मुमकिन है आसमां पे सितारे बिखेर दें,

जिन पंछियों के पर को कतरने लगे हैं लोग।

दुश्मन का कोई खौफ नहीं आज दोस्तो,

हर घर में अपने भाई से डरने लगे हैं लोग।

इस दौर का मिज़ाज भी ऐसा बदल गया,

एक दूसरे के दिल से उतरने लगे हैं लोग।

बच्चे ने एक तितली के दो टुकड़े कर दिए,

आँखों को बंद करके गुज़रने लगे हैं लोग।

अच्छों का पहले जिससे कोई वास्ता ना था,

‘पंकज’ वो काम  शौक़ से करने लगे हैं लोग।

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