आपका हार्दिक स्वागत है

उलझन जीवन का


उलझन जीवन का

अद्भुत किस्सा है

आँखों में दुःख का

अपना हिस्सा है, 

कौन कहता है –

मुबारक हो तुम्हें दु:ख मिला है, 

बदले में एक दिन सुख खिला है

होश संभालते ही

कौन टकराता है उलझनों से,

कौन इश्क नहीं करता है सपनों से!

मैंने भी किया

आपने भी किया

क्योंकि –

उलझन का मेरे घर में

अपना ही कमरा है, 

कमरे की दीवार पर

हर कील का दुःख भी मेरा अपना है…!



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