आपका हार्दिक स्वागत है

उस रात…

आंखों में खामोशी थी,

सांसों में मदहोशी थी

घुंघरुओं की खनखनाहट थी,

दिल में अजीब सरसराहट थी,

ख्‍वाबों में बेचैनी थी,

दूरियां न अब सहनी थी,

न जाने ये कैसी दरकार थी,

जो जागते हुए भी बरकरार थी..!!

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