आपका हार्दिक स्वागत है

ज्योति शोभा की पॉंच कविताएँ

1) खालीपन के बिल में स्त्री नहीं भरती खालीपन को मित्र नहीं भरते दुनिया में चलतीं इतनी साँसें एक खाली…

add comment