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भारतीय आभा से दीप्त लेखन

भारतीय मनीषा अपने सांगोपांग समुच्चय के साथ कुबेरनाथ राय की रचनाओं में प्रतिफलित हुई है। उनके लिखे का पारायण भी…

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र: हिन्दी समाज को आधुनिकता में लाने वाले संस्कृति के देसी अग्रदूत

भारतेन्दु हरिशचंद्र पर बात करने के लिए मैं उनकी साहित्यिक अवस्थिति के राजनीतिक निहितार्थों से अपनी बात शुरू करना चाहूँगा।…

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समाज और संस्कृति: भारत से मॉरीशस

मॉरीशस यानी हिन्द महासागर का मोती। 720 वर्ग मील में फैला एक द्वीप, जो वर्तमान समय में लघु भारत कहा…

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तुलसीदास : आमजन के कवि

(तुलसी के निजी जीवन के अनुभवों के आलोक में उनके साहित्यिक जीवन की पड़ताल) तुलसी की पत्नी से नहीं बनी।…

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डॉ. रामविलास शर्मा का आलोचना कर्म : हिन्दी आलोचना का ‘ज्ञानकांड’

आलोचक डॉ. रामविलास शर्मा जयंती (10 अक्टूबर) पर विशेष आलेख डॉ. रामविलास शर्मा हिन्दी के प्रख्यात मार्क्सवादी आलोचक विचारक, भाषाविद्…

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व्यंग्य और सामाजिक यथार्थ

व्यंग्य का हिंदी साहित्य में प्रचलन काव्य के क्षेत्र में कबीर से होता है। कबीर हिंदी काव्य साहित्य में व्यंग्य…

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साहित्य में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और हिमांशु जोशी

भारत में सभ्यता और संस्कृति शब्द जनसामान्य में प्रायः एक ही उद्देश्य से प्रयुक्त किए जाते हैं परन्तु इन दोनों…

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शोषण तंत्र को बेनकाब करती मदन कश्यप की कविताएं

समकालीन हिंदी कविताओं में मदन कश्यप काफी चर्चित और पठित कवि हैं ।आम आदमी के हक-हकूक के लिए वे पूर्ण…

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एक दृष्टि : कृष्णा सोबती : ‘बादलों के घेरे’ से

“औक़त न  क़लम की /न लेखक की/न लेखन की/ज़िन्दगी फैलती चली गई/कागज़ के पन्नों पर/कुछ इस तरह ज्यों धरती में…

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बस्तरिया आदिवासी कविता

बस्तर के जनजातीय परिवेश में कविता सदियों से लहलहाती फसल रही है। आदिवासी कविता ने कभी जनजीवन के हर्ष और…

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अलग-अलग वैतरणी

एक तरफ है उपन्यास सम्राट और कथा सम्राट प्रेमचंद की कालजयी कृति ‘गोदान‘ उपन्यास की कथा। तो दूसरी तरफ है…

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