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नरेश गुर्जर की छह कविताएँ

(1) सुनो सुनो… चुप न रहो मेरी बात के हाथ पर अपनी हथेली रख दो और छू लेने के सुख…

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कितने दुःख सिरहाने आ कर बैठ गए

नरेश सक्सेना जैसी जिजीविषा और कविता तो सब को मिले पर उन के जैसा दुःख और यह कथा किसी भी…

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उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक एकात्मता

संस्कृति व्यक्ति और राष्ट्र को दृष्टि देती है। जीवन-शैली एवं जीवन-मूल्यों का निर्धारण करती है और विशिष्ट जीवन-दर्शन का निर्माण…

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मृदुला सिन्हा जी का जन्मदिन और ममत्व की छाँव में भीगता मन!’

“आपका चले जाना इस दुनिया के लिए होगा, लेखन संसार और मेरे लिए कतई भी नहीं!” 18 नवंबर, 2020 को…

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डॉ. मृदुला सिन्हा: लोक आलोक की सांस्कृतिक सुरसरि

वरिष्ठ साहित्यकार एवं गोवा की पूर्व राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा का 18 नवंबर 2020 को 77 साल की उम्र में…

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देख दुपहरी जेठ की

मई का मध्याह्न। चिलचिलाती हुई धूप और तेज लू की लपटों के बीच किसी आम के पेड़ के नीचे बोरे…

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यश पब्‍लिकेशन और साहित्‍यिकी डॉट कॉम के तत्त्वावधान में प्रतियोगिता

कलम की कसौटी प्रतियोगिता-4 का नियम/विवरण 1- दिए गए विषय व विधा पर आधारित अपनी रचना 1000-1500 शब्दों में, 1…

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जनक की पाती उर्मिला के नाम

मेरी प्राणजा, मैथिली, जनकदुलारी, वैदेही, जानकी प्रिय उर्मिले, ये पत्र तो सीता जीजी के लिए है! मेरे इन संबोधनों को…

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हिंदी लोकतांत्रिक एवं समन्वयकारी भाषा: रामदरश मिश्र

पुस्तक ‘जारी अपना सफ़र रहा’ का लोकार्पण हुआ अप्रैल 7, 2019. वरिष्ठ साहित्यकार रामदरश मिश्र के आवास पर हिंदी अकादमी…

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ज्यों मेंहदी को रंग : निशक्तता की पीड़ा का जीवन्त दस्तावेज

संवेदनशीलता किसी भी समाज की पूँजी होती है, जिसके नींव पर सभ्यता खड़ी होती है। अपने आसपास के जरूरतमंद व…

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साहित्‍यिकी डॉट कॉम का लोकार्पण संपन्‍न

‘मंगल भवन अमंगल हारी’ है साहित्‍य का ध्‍येय : डॉ. कमल किशोर गोयनका सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार एवं केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल…

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पराजित नायकत्व के दौर का साहित्य

हम सभी के बचपन में हर कहानी की शुरुआत हमेशा ‘एक था राजा’ से होती थी। वह राजा भी सर्वगुण…

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वो शायर जो शराब की बोतल में डूबकर दुनिया को नशा देता था

शिव कुमार बटालवी के गीतों में ‘बिरह की पीड़ा’ इस कदर थी कि उस दौर कीप्रसिद्ध कवयित्री अमृता प्रीतम ने…

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