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योगिता शर्मा ‘ज़ीनत’ की तीन ग़ज़लें

(1) तेरी महफ़िल में गर ठहर जाते हम तिरी बेरुख़ी से मर जाते तेरा हर ज़ुल्म सह लिया हँसकर छोड़…

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