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सिनीवाली

ग्राम स्वराज

उन्होंने गाँव में दो मंजिला मकान बनवा रखा है पर आते कम ही हैं गाँव। सालभर में एकाध बार या…

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संतोष त्रिवेदी

सम्मान-समिति की निर्णायक बैठक!

सम्मान-समिति की पहले से ‘फ़िक्स’ बैठक शहर के एक अज्ञात स्थान पर रखी गई। उद्देश्य यह था कि साहित्य में…

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रणजीत कुमार सिन्हा

मदन डांगा की काव्य दृष्टि

हिंदी कविता में अभिजात्य वर्ग से संघर्ष की शुरुआत निराला ने किया। इससे पहले साम्राज्यवादी ताकतों के विरुद्ध आवाज भारतेंदु…

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डॉ. यशस्‍विनी पांडेय

अधूरेपन में पूर्ण कवि मुक्तिबोध

मैं मुक्तिबोध पर लिखते समय अपनी पहली पंक्ति की शुरुआत ऐसे नहीं करना चाहूंगी कि वैसे तो मुक्तिबोध के बारे…

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अंशु जोशी

बगुला भगत

सुबह की आपाधापी से सफलतापूर्वक निबट वह अपनी पसंदीदा मसाला चाय लिए सोफे पर आलथी-पालथी मारकर बैठ चुकी थी. बेटा…

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पंकज कुमार

अब मौसम बदलेगा

कैसा होता है अकेलापन का स्वाद? कैसे समझा जा सकता है एकांतवास को? ओह! देखो ना मुझे खीच रही है…

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क्षमा सिंह

धान रोपती औरतें

धान रोपती औरतें गाती हैं गीत और सिहर उठता है खेत पहले प्यार की तरह धान रोपती औरतों के पद…

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उपमा 'ऋचा'

छोटी सी एक छत…

जिस तरह तीन अधूरे क़िस्से मिलकर एक पूरी कहानी रच सकते हैं, ठीक उसी तरह घर    बनाने के लिए…

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दीप्ति शर्मा (दुर्गेश)

श्रमिक

देखती हूँ, अक्सर कुछ गरीबों को बहुत मेहनत करते हुए फिर भी उनकी मेहनत का किसी पर कोई उपकार नहीं…

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संगीता कुमारी

रूठी कविता

भारत माँ का शीर्ष हिमालय मानव सोच मस्तिष्क शिवालय शिव संग नीर बसा रहता है जीवन बन नीर बहा करता…

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डॉ. सारिका कालरा

समीक्षा- रस्सी पर चलती लड़की (काव्य संग्रह)

‘रस्सी पर चलती लड़की काव्य संग्रह 2017 में प्रकाशित हुआ है। यह भगवान वैद्य प्रखर द्वारा लिखित दूसरा काव्य संग्रह…

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करिश्मा पंडित

गीत और गजल

हम जवां कच्‍ची उड़ान के नतीजों से हमें क्‍या डरना, हम तो हर ज़ख़्म को सीने में जगह देते हैं;…

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प्रीति राघव

वचनबद्ध

प्रतीक्षा करो तुम …..तब तक,प्रकृति की अनुराग मंत्रणा के निमित्तप्रेम कोंपलो को पुलकित हर्षित होने दोजब मन की प्रवाहिनी कलकल बहेगी और चन्द्रमा की…

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डॉ. यशस्‍विनी पांडेय

बचा रहेगा सब कुछ

यशस्विनी पांडेय कोई भी रचनाकार प्रेम, समय, समाज और प्रकृति के रूपों को उनकी वास्तविकता व सम्पूर्णता में व्यक्त नहीं…

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निर्मल वर्मा

एक भारतीय कम्युनिस्ट की आत्मकथा

वामपंथी बुद्धिजीवी मोहित सेन की पुस्तक ‘एक भारतीय कम्युनिस्ट की जीवनी: एक राह, एक यात्री’ की सुप्रसिद्ध साहित्‍यकार व विचारक…

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सतीश सिंह

ग़ज़लें

1) बेसहारे से सहारे की तरह मिलता हूँ बदगुमानों से आईने की तरह मिलता हूँ मौसम के मिज़ाज कितने भी…

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डॉ. पंकज कर्ण

बिखरने लगे हैं लोग

अपनी ज़मी से ख़ुद ही उजड़ने लगे हैं लोग, पत्तों की तरह आज बिखरने लगे हैं लोग। मुमकिन है आसमां…

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डॉ. सारिका कालरा

बचा रहेगा – सिर्फ एक अहसास!

आज की हवा में एक खुशबू मिली हुई थी। रात की बारिश ने जैसे इस महानगर के सारे प्रदूषण को…

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केशव शरण

आपस में चुप

कमरे में हम चार हैं हम चारों यार हैं हम बहुत दिनों बाद मिले हैं हम बहुत-सी बातें करना चाहते…

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संजीव सिन्‍हा

कलम की कसौटी प्रतियोगिता का परिणाम

यश पब्‍लिकेशन एवं साहित्‍यिकी डॉट कॉम द्वारा आयोजित कलम की कसौटी प्रतियोगिता का विषय था ‘राष्ट्रवाद’ और विधा थी ‘निबंध’।…

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