आपका हार्दिक स्वागत है
सतीश सिंह

ग़ज़लें

1) बेसहारे से सहारे की तरह मिलता हूँ बदगुमानों से आईने की तरह मिलता हूँ मौसम के मिज़ाज कितने भी…

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डॉ. पंकज कर्ण

बिखरने लगे हैं लोग

अपनी ज़मी से ख़ुद ही उजड़ने लगे हैं लोग, पत्तों की तरह आज बिखरने लगे हैं लोग। मुमकिन है आसमां…

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केशव शरण

आपस में चुप

कमरे में हम चार हैं हम चारों यार हैं हम बहुत दिनों बाद मिले हैं हम बहुत-सी बातें करना चाहते…

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पंखुरी सिन्‍हा

परमानेंट बाशिंदगी की फंतासी

पाने में निजात उस भयानक दर्द से भयानक तकलीफ से उस कुछ सभालने में उसे हज़ार किस्से, हजारों कहानियां हज़ार…

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अनुभूति गुप्ता

उलझन जीवन का

उलझन जीवन का अद्भुत किस्सा है आँखों में दुःख का अपना हिस्सा है,  कौन कहता है – मुबारक हो तुम्हें…

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पंकज कुमार

आत्म-महत्व

मैंने कहा कोई बात नहीं वो रहती थी वो रहती थी कहाँ और कैसे? यह भी महत्व का विषय नहीं…

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तूलिका स्‍वाती

जो मन पर थी गुजरी

जो मन पर थी गुजरीजो मन से ना उतरीकुछ किस्से पुरानेसब जीने के बहानेरस्तों की आवारगीबेबाक़ सी वो दिल्लगीसब कुछ…

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सतीश सिंह

गजलें

1) जिंदगी को खुशी और गम दे गया मुश्किलों में जीने का हुनर दे गया  मेरी जिंदगी की गुरबतें ले…

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प्रीति राघव

चहलकदमी

मन के अरण्य मेंभावनाओं की ओस से भीगी कुशा परनंगे पैर घूमना ठीक, इसी प्रकार हैतुम्हारे प्रेम में मेरे मन का होनानम…

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अनुभूति गुप्ता

जीना शराब सा..

लगे कुछ कुछ खराब सा अब गिरे, तब गिरे, पिए तो भी ग़म से घिरे, बेशकीमती है नजर जिसकी, हर…

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