आपका हार्दिक स्वागत है
सतीश सिंह

गजलें

1) जिंदगी को खुशी और गम दे गया मुश्किलों में जीने का हुनर दे गया  मेरी जिंदगी की गुरबतें ले…

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प्रीति राघव

चहलकदमी

मन के अरण्य मेंभावनाओं की ओस से भीगी कुशा परनंगे पैर घूमना ठीक, इसी प्रकार हैतुम्हारे प्रेम में मेरे मन का होनानम…

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अनुभूति गुप्ता

जीना शराब सा..

लगे कुछ कुछ खराब सा अब गिरे, तब गिरे, पिए तो भी ग़म से घिरे, बेशकीमती है नजर जिसकी, हर…

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दीप्ति अंगरीश

…बस अंतिम बार

मानो कल की बात होटेबल पर नया कैलेंडर सज गयादिन बीतते गएपर यादों का काफिला सदाबहारजानते हुई भी बेसुध रहीपीर…

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पंखुरी सिन्‍हा

डेटिंग ऑनलाइन

कागज़ होता तो वो चूमती उसे लेकर शायद उसका नाम भी लेकिन सबकुछ मायावी था तारों में, जालों में मशीन…

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शिवांगी पुरोहित

गिरकर उठना सीख गई

हंसती खेलती मेरी दुनिया, एक दिन बेरंग हो गई।कुछ समझ ही न पाई मैं , उसके चले जाने के बाद।पहले…

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डॉ. अर्चना सिंह

धारणा और गुलाम

[1]         ‘धारणा’          काले, बड़ी-बड़ी जालियों वाले मोज़े           पहनने वाले को           भ्रम है …..           पैर नंगे नहीं…

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अंशु प्रियदर्शिनी

उस रात…

आंखों में खामोशी थी, सांसों में मदहोशी थी घुंघरुओं की खनखनाहट थी, दिल में अजीब सरसराहट थी, ख्‍वाबों में बेचैनी…

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पंकज कुमार

तुम ऐसी कैसे हो सकती हो?

तुम कल भी माँ थी किसी की, किसी की थी बहन, बेटी और पत्नी और आज भी हो पूजता आ…

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डॉ. वेद मित्र शुक्ल

दो ग़ज़लें

1. दामन नहीं भिगोया होगा, पर, अन्दर से रोया होगा। पहुँचे आज बुलंदी पर जो, सोचो क्या-क्या खोया होगा। आज…

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